इतिहासकार · शिक्षक · लेखक
डॉ. हुकम चन्द जैन
लगभग चार दशकों से वे इतिहास की वे पुस्तकें लिख रहे हैं जिनसे देश भर के विद्यार्थी पढ़ते हैं: आधुनिक विश्व, भारत और अपने राजस्थान पर। हिन्दी, अंग्रेज़ी और मराठी में।
जो शब्द उभर कर आते हैं, वो आत्मा से निकल कर आते हैं… और सीधे पाठक के हृदय में उतर जाते हैं।

- 1978इतिहास अध्यापन की शुरुआत
- 1986पहली पुस्तक
- 20+पुस्तकें
- 36राजस्थान इतिहास पुस्तक के संस्करण
- 3भाषाएँ: हिन्दी, अंग्रेज़ी, मराठी
- 10पीएच.डी. शोधार्थियों का मार्गदर्शन
अध्याय दर अध्याय
इतिहास में एक जीवन
हुकम चन्द जैन का जन्म 1955 में जयपुर में हुआ और बचपन झालावाड़ में बीता। सत्रह वर्ष की आयु में पिता का साया उठ गया; पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने एक सुरक्षित नौकरी ठुकरा दी, और आगे चलकर हिन्दी में इतिहास के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखकों में से एक बने। यह है उनका जीवन, अध्याय दर अध्याय।
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1955
जयपुर में जन्म
कोटा से जुड़े परिवार की पाँचवीं संतान; उनके दादाजी कोटा रियासत की सेवा में थे। बचपन और स्कूली शिक्षा झालावाड़ में।
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17 वर्ष
पिता का साया उठा
बड़े भाई ने उनकी पढ़ाई की ज़िम्मेदारी संभाली, और वे इतिहास पढ़ने जयपुर गए।
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1978
जीवन का मोड़
जयपुर के जैन समाज पर एम.फिल. पूरा किया और विजयनगर कॉलेज, अजमेर में अध्यापन शुरू किया। एक घनिष्ठ मित्र के जैन दीक्षा लेने के निर्णय ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
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1982
मेरिट में प्रथम
राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा कॉलेज व्याख्याता (इतिहास) पद पर मेरिट में प्रथम स्थान से चयन। आठ वर्षों तक वे साइकिल से कॉलेज जाते रहे।
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1986
पहली पुस्तक
तब हिन्दी में आधुनिक विश्व इतिहास पर कोई गंभीर पुस्तक नहीं थी। जल्द ही यह दिल्ली में सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय हो गई।
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1997
इतिहास विभागाध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय, कोटा
2013 तक विभाग का नेतृत्व; 13 वर्षों तक कोटा विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन मंडल के संयोजक।
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2004
पीएच.डी.
‘इतिहास मार्तण्ड’ गौरीशंकर हीराचन्द ओझा के समग्र अवदान पर; बाद में हिन्दी और अंग्रेज़ी में प्रकाशित।
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2009
महाराणा कुम्भा पुरस्कार
महाराणा मेवाड़ फ़ाउंडेशन, उदयपुर द्वारा, इतिहास लेखन के माध्यम से जनजागरण के लिए।
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2015
प्राचार्य
राजकीय सेवा से सेवानिवृत्ति, और उसी वर्ष अकलंक कन्या पीजी महाविद्यालय, कोटा के प्राचार्य (2015–2019)।
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2025
विश्व इतिहास का 29वाँ संस्करण
1980 के दशक में पहली बार लिखी गई ‘आधुनिक विश्व इतिहास’ का 29वाँ हिन्दी संस्करण, और साथ में 18 अंग्रेज़ी संस्करण। लगभग चालीस वर्ष बाद भी सिविल सेवा के अभ्यर्थी इसे पढ़ रहे हैं।
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आज
लेखन जारी
2025 में राजस्थान इतिहास का अंग्रेज़ी संस्करण और 2026 में नई डेस्क बुक प्रकाशित। राजस्थान विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के सदस्य।



उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक
विश्व इतिहास की वह पुस्तक जिसके साथ देश के सिविल सेवा अभ्यर्थी बड़े हुए
आधुनिक विश्व इतिहास, 1500–2000 · डॉ. कृष्ण चन्द्र माथुर के साथ · हिन्दी, अंग्रेज़ी और मराठी
1980 के दशक में हिन्दी में लिखी गई, जब अभ्यर्थियों के पास अपनी भाषा में इस विषय की कोई गंभीर पुस्तक नहीं थी। दशकों से संशोधित यह पुस्तक आज भी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I और इतिहास वैकल्पिक की यूपीएससी पठन-सूचियों में है।
- 29हिन्दी संस्करण
- 18अंग्रेज़ी संस्करण
- 733Amazon पर पाठक रेटिंग
- 4.3★औसत रेटिंग
इनके द्वारा अनुशंसित
- Testbookजीएस प्रश्नपत्र I और इतिहास वैकल्पिक के लिए “यूपीएससी टॉपर्स द्वारा अनुशंसित”
- Anantam IAS“विस्तृत और विश्वसनीय”, क्रांतियों और विश्वयुद्धों पर गहराई के साथ
- Civilsdailyअखिल भारतीय रैंक धारकों द्वारा सुझाई गई इतिहास पुस्तकों में
- PW Only IASजीएस प्रश्नपत्र I विश्व इतिहास के लिए मानक पुस्तक
पाठक क्या कहते हैं
- ★★★★★
यूपीएससी विश्व इतिहास का पूरा पाठ्यक्रम व्यवस्थित ढंग से समेटती है।
अंग्रेज़ी संस्करण · 2026 - ★★★★★
यूपीएससी इतिहास वैकल्पिक के लिए सबसे अच्छी पुस्तक।
अंग्रेज़ी संस्करण, 18वाँ · 2024 - ★★★★★
सरल भाषा, और यूपीएससी वैकल्पिक के लिए बहुत उपयोगी।
हिन्दी संस्करण · 2022 - ★★★★★
विस्तृत विश्व इतिहास के लिए बहुत अच्छी; वैकल्पिक और ऑनर्स के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी।
हिन्दी संस्करण · 2023 - ★★★★☆
स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी।
अंग्रेज़ी संस्करण · 2024 - ★★★★★
विश्वयुद्धों से पहले के काल का विस्तृत विवेचन।
अंग्रेज़ी संस्करण · 2023
Amazon.in पर पाठकों की टिप्पणियाँ, सार रूप में। नवंबर 2026 की स्थिति: अंग्रेज़ी संस्करण 471 रेटिंग से 4.4★, हिन्दी संस्करण 262 रेटिंग से 4.2★। अधिकतर पठन-सूचियाँ सामान्य अध्ययन के लिए इसे नॉर्मन लोव के साथ, विस्तृत संदर्भ के रूप में पढ़ने का सुझाव देती हैं।
पुस्तक-संग्रह
उनकी पुस्तकें
बीस से अधिक पुस्तकें, यूपीएससी की तैयारी से लेकर कक्षा 10 तक; कई दशकों से पुनर्मुद्रित।
उनकी अपनी आवाज़ में
उनके अपने शब्दों में
72 मिनट की बातचीत (2025): उनका बचपन, जीवन को दिशा देने वाले निर्णय, और वे आज भी हाथ से क्यों लिखते हैं।
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उनके पाठक
पीढ़ियों ने पढ़ा
शिक्षक और पाठक यूट्यूब पर उनकी पुस्तकों की समीक्षा करते हैं। और समीक्षाएँ वीडियो संग्रह में हैं।
सम्मान
सम्मान एवं पुरस्कार
- 2009महाराणा कुम्भा पुरस्कारमहाराणा मेवाड़ फ़ाउंडेशन, उदयपुर
- 2009शिक्षा में योगदान के लिए सम्मानपं. नवल किशोर शर्मा, पूर्व राज्यपाल, गुजरात
- 2013पुस्तकें अमेरिकी लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में संग्रहीतवॉशिंगटन डी.सी.
- 2022जैन धर्म रत्न इंटरनेशनलजैन वर्ल्ड मिशन, नई दिल्ली















