उनके चैनल से
आरजे सावी के साथ बातचीत (2025)
An exclusive interview with Dr. Hukamchand Jain by RJ Saavi
मुख्य बातें
- उनकी शुरुआत शिक्षक के रूप में हुई, लेखक वे धीरे-धीरे बने।
- निरंतरता सबसे ज़रूरी है: चाहे एक पेज रोज़।
- हिन्दी में विश्व इतिहास की उनकी पहली पुस्तक आईएएस अभ्यर्थियों ने पढ़ी, क्योंकि हिन्दी में और कुछ नहीं था।
- उस समय: ‘राजस्थान का इतिहास’ का 34वाँ संस्करण (2026 तक 36); ‘आधुनिक विश्व इतिहास’ के 29 हिन्दी और 18 अंग्रेज़ी।
- उनके मार्गदर्शन में अधिकांश शोधार्थियों ने हाड़ौती पर काम किया।
- वे स्वयं की दूसरों से तुलना नहीं करते, और युवाओं से डर छोड़कर बदलाव स्वीकारने को कहते हैं।




