राजस्थान पर गिनी-चुनी पुस्तकें ही इतनी बार छपी हैं। डॉ. हुकम चन्द जैन और डॉ. नारायण लाल माली द्वारा लिखी और राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर से प्रकाशित इस पुस्तक का 36वाँ संस्करण 2026 में आया, और 2025 में इसका अंग्रेज़ी संस्करण भी प्रकाशित हुआ।

यही वह पुस्तक है जिसके माध्यम से राजस्थान के अधिकतर विद्यार्थी पहली बार उनका नाम जानते हैं।

राजस्थान की अपनी अकादमी से

जयपुर की राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी राजस्थान सरकार का एक उपक्रम है, जो हिन्दी में गंभीर पुस्तकें प्रकाशित करने के लिए बनी। डॉ. जैन ने यह पुस्तक इतिहासकार और सहायक आचार्य डॉ. नारायण लाल माली के साथ लिखी, और तब से दोनों मिलकर इसे संशोधित करते आए हैं। अपने वीडियो में वे बताते हैं कि यह संस्करण दर संस्करण लगातार छपती रही है।

पुस्तक में क्या है

राजस्थान की लोकप्रिय पुस्तक के 33वें संस्करण पर

33वें संस्करण के अवसर पर एक छोटी वार्ता में डॉ. जैन इसकी रूपरेखा बताते हैं: पुरातत्व और राजस्थान के इतिहास के स्रोतों से लेकर राजवंशों (कछवाहा, सिसोदिया, राठौड़, भाटी, चौहान, झाला) तक, जन-जागरण, स्वतंत्रता, किसान और जनजातीय आंदोलन, और फिर मेले, त्योहार, साहित्य, चित्रकला, स्थापत्य, मंदिर, वेशभूषा और आभूषण। राजस्थान का इतिहास, वे कहते हैं, एक बहता झरना है, जहाँ शक्ति और भक्ति का संगम है।

राजस्थान का इतिहास एक ऐसा बहता हुआ झरना है… यहाँ शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है।

अध्यायों के भीतर

समीक्षा: राजस्थान का इतिहास, 2025 संस्करण

पुस्तक में सोलह अध्याय हैं और सत्रहवाँ ‘विविध’। 2025 संस्करण की समीक्षा करने वालों ने बताया कि पाठकों को इसमें क्या मिलेगा: प्रमुख राजवंश; मराठा हस्तक्षेप और अंग्रेज़ी प्रभुत्व व उनके परिणाम; राजपूत कालीन प्रशासन, समाज और अर्थव्यवस्था; 1857; जन-जागरण, जिसमें जनजातीय व किसान आंदोलन, क्रांतिकारी गतिविधियाँ और पत्रकारिता की भूमिका; प्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण; किले और स्मारक; चित्रकला और हस्तशिल्प; राजस्थानी साहित्य और बोलियाँ; मेले, त्योहार, लोक संगीत, नृत्य और वाद्य; धार्मिक आंदोलन, संत, सूफ़ी और लोक देवता; पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक व्यक्तित्व; और अंतिम अध्याय में राजपूत प्रतिरोध, आधुनिक राजस्थानी व हिन्दी साहित्य, और आभूषण जैसे विषय।

यह किसके लिए है

वे इसकी लोकप्रियता का कारण सरलता से बताते हैं: यह राजस्थान लोक सेवा आयोग और अन्य बोर्डों की लगभग हर परीक्षा में सहायक है, आरएएस और स्कूल व कॉलेज व्याख्याता से लेकर पटवारी और शिक्षक परीक्षाओं तक।

संस्करण दर संस्करण

आँकड़े ही कहानी कहते हैं। 2020 के उनके बायोडाटा में 26 संस्करण दर्ज हैं; नवंबर 2022 तक यह 32वें पर पहुँची, फिर 33वें पर; 2025 के साक्षात्कार में उन्होंने 34 की बात की; अक्टूबर 2025 में 35वाँ संस्करण आया, राजस्थान के 41 जिलों के नए मानचित्र के अनुसार; और 2026 में 36वाँ। उसी वर्ष अंग्रेज़ी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए जैन प्रकाशन मंदिर से 665 पृष्ठों का अंग्रेज़ी संस्करण ‘Rajasthan: History, Culture and Tradition’ प्रकाशित हुआ।

एक साथ 21,000 प्रतियाँ

राजस्थान का इतिहास एवं विरासत

नवंबर 2022 में 32वें संस्करण का परिचय देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग हर उत्तर संशोधित किया गया और 52 पृष्ठ जोड़े गए, और अकादमी के इतिहास में पहली बार 21,000 प्रतियाँ एक साथ छपीं। हर नया संस्करण, वे कहते हैं, बाज़ार में आते ही बिक जाता है।

पाठक क्या कहते हैं

यूट्यूब पर समीक्षक इसे प्रामाणिक संदर्भ बताते हैं जिस पर अन्य गाइड आधारित होती हैं, 2025 में राजस्थान के 41 जिलों के अनुसार अद्यतन, और बिंदुवार ढंग से व्यवस्थित जो आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए उपयुक्त है। चूँकि यह सिद्धांत की पुस्तक है, बहुविकल्पीय प्रश्नों की नहीं, वे इसके साथ प्रश्न-पुस्तिका पढ़ने का सुझाव देते हैं।

इसे कैसे पढ़ें

आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए सिद्धांत अध्याय-दर-अध्याय पढ़िए और हर अध्याय से लघु उत्तर लिखने का अभ्यास कीजिए। प्रारंभिक परीक्षा और पटवारी, पुलिस या रीट के लिए संस्कृति के अध्यायों से शुरू कीजिए, जिनसे प्रश्न सबसे अधिक आते हैं, और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की एक पुस्तक जोड़िए, क्योंकि इसमें वे नहीं हैं। मेले, लोक देवता, चित्रकला और किले कई बार दोहराइए। और हमेशा नवीनतम संस्करण लीजिए: जिलों की सीमाएँ और तथ्य बदलते हैं, और हर संस्करण संशोधित होता है।

उनके लिए राजस्थान क्यों

आरजे सावी के साथ बातचीत (2025)

अपने साक्षात्कार में वे बताते हैं कि इस विषय की ओर उन्हें क्या खींचता है। राजस्थान की संस्कृति सदियों तक रजवाड़ों में रही, पर उसकी असली गहराई उसकी लोक कला, लोक संगीत और लोक गीतों में है; जैसलमेर से जोधपुर तक, वे कहते हैं, दुनिया में ऐसी विविधता बहुत कम जगह मिलेगी, और मनुष्य इसी विविधता में जीता है। वे इसे सतरंगी समाज कहते हैं, और कहते हैं कि उनका प्रयास इसे सराहना और आगे बढ़ाना रहा है।

ऐसा सतरंगी हमारा समाज है राजस्थान का, जिसको आगे बढ़ाना चाहिए।

आरएएस एवं आरपीएससी: राजस्थान का इतिहास, कला एवं संस्कृति

डॉ. जैन के अपने वीडियो से लिखा गया।